Author ; Premchand
Format ; Paperback
ISBN-13 ; 9788192434650
Publication ; Lokbharti Prakashan
Publisher ; Lokbharti Prakashan
Edition ; 3rd
Pages ; 448
Language ; Hindi
Category ; Fiction
Publication Year ; 2018
Reprint Year ; 2025
Weight ; 406 g
Dimensions ; 21 × 14 × 2 cm
SKU ; 9788192434650
Rangbhoomi
‘सूरदास’ एक चरित्र नहीं, नायक है और इसी नायकत्व की सृष्टि के लिए सूरदास और ज्ञानसेवक ने उपन्यास में अपनी-अपनी भूमिकाएँ अदा की हैं। ‘सूरदास’ चौतरफ़ा भौतिक दृष्टि से पराजित होने के बाद भी सदा सुखी रहता है। उसके मन में कभी भी मैल नहीं आता। जीत-हार में भी, इस समान स्थिति में कोई अन्तर नहीं आता। उसने नीति का मार्ग कभी भी नहीं छोड़ा। अपने प्रतिद्वन्द्वी पर कभी भी धोखे से वार नहीं किया। इतना दीन-हीन होते हुए भी उसमें क्षमाशीलता और उदारता सदा बनी रहती है।
स्पष्ट लगता है कि प्रेमचन्द अपने समय के संग्राम के लिए शलाका पुरुष की सृष्टि कर रहे हैं जो लोगों के लिए एक आदर्श नायक बन सकेगा।
यह भी स्पष्ट है कि प्रेमचन्द तत्कालीन परिस्थिति में अपने देश की जनता के जीवन की एक ऐसी व्याख्या प्रस्तुत कर रहे थे जो देश को आज़ाद करने का सही मार्ग था। वस्तुत: देश की आज़ादी के लिए उस समय चल रहे क्रान्तिकारी मार्ग के स्थान पर देश को सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर ले जाना चाहते थे। यही कारण है कि उन्होंने ‘रंगभूमि' को यह महाकाव्यात्मक रूप प्रदान किया। यही कारण है कि सूरदास किसान दृष्टि का प्रतिनिधि होने के बावजूद एक चरित्र नहीं वरन् प्रेमचन्द द्वारा सृजित उनकी आदर्शवादी दृष्टि का महानायक है। कथावाचन से लेकर चरित्रांकन तक रंगभूमि का सृजन जैसे एक लेखक का आत्मसंवाद है। प्रेमचन्द ने बड़ी महारत के साथ गांधी जी के सत्याग्रह और अहिंसा सम्बन्ध सोच को औपचारिक रूप देकर सचमुच एक महान सृजन किया है। ऐसा वही कथाकार कर सकता है जिसके प्राणों में उसके देश की धरती और आदर्श समाए हुए हों।

















