| More Information | |
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2025 |
| Edition Year | 2025, Ed. 1st |
| Pages | 452p |
| Publisher | Lokbharti Prakashan |
| Dimensions | 22 X 14 X 2.5 |
Bhasha Evam Bhasha Vigyan Author: Mahavir Saran Jain
इस पुस्तक में भाषा विज्ञान के विद्यार्थियों, छात्रों तथा अनुसन्धान कार्यकर्ताओं के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत है। विगत पाँच दशकों में मैंने भाषाविज्ञान के क्षेत्र में देश तथा विदेशों में जो अध्ययन, अध्यापन तथा अनुसंधान कार्य किया है यह पुस्तक उसका परिणाम है।
पुस्तक में संचार तथा संप्रेषण के संबंध में मानव भाषा के निर्माण और विकास के संबंध में, भाषा विज्ञान में विवेच्य भाषा के अभिलक्षण (परिभाषा) स्वरूप तथा विशेषताओं, भाषा-व्यवस्था एवं भाषा-व्यवहार, भाषा-संरचना एवं भाषिक प्रकार्य की विवेचना, भाषा तथा व्यक्ति और समाज/भाषा और विचार/भाषा और संस्कृति तथा भाषा और साहित्य के संबंध में, भाषा-क्षेत्र एवं भाषा के विविध रूपों के संबंध में विश्व के भाषा-परिवारों की विवेचना, भारत - यूरोपीय भाषा-परिवार के संबंध में विचार, भाषा विज्ञान के नामकरण, परिभाषा, स्वरूप एवं व्याप्ति अथवा अध्ययन-क्षेत्र के संबंध में, भाषा विज्ञान की अध्ययन पद्धतियाँ अथवा भाषा-अध्ययन की दिशाओं के संबंध में, भाषा विज्ञान के प्रमुख विभागों अथवा भाषा विज्ञान की प्रमुख शाखाओं के सम्बन्ध में विचार प्रस्तुत किया गया है।
इसके अंतर्गत ध्वनि विज्ञान अथवा स्वन विज्ञान, स्वनिम विज्ञान, रूपिम विज्ञान, वाक्य विज्ञान तथा अर्थ विज्ञान, अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान की शाखाओं में भाषा शिक्षण, अनुवाद विज्ञान, कोश विज्ञान प्रमुख हैं। भाषा विज्ञान से संबंधित अध्ययन विभाग हैं - मनोभाषाविज्ञान, मानवजाति, भाषा- विज्ञान, समाज भाषा विज्ञान, शैली विज्ञान ।
देवनागरी लिपि की विशेषताओं, वैज्ञानिकता एवं मानकीकरण के सम्बन्ध में विचार तथा प्रमुख वैयाकरणों एवं प्रमुख भाषा वैज्ञानिकों की विवेचना की गई है....
मुझे विश्वास है कि हिन्दी जगत में इस पुस्तक का स्वागत होगा.।
महावीर सरन जैन
इस पुस्तक में भाषा विज्ञान के विद्यार्थियों, छात्रों तथा अनुसन्धान कार्यकर्ताओं के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत है। विगत पाँच दशकों में मैंने भाषाविज्ञान के क्षेत्र में देश तथा विदेशों में जो अध्ययन, अध्यापन तथा अनुसंधान कार्य किया है यह पुस्तक उसका परिणाम है।
पुस्तक में संचार तथा संप्रेषण के संबंध में मानव भाषा के निर्माण और विकास के संबंध में, भाषा विज्ञान में विवेच्य भाषा के अभिलक्षण (परिभाषा) स्वरूप तथा विशेषताओं, भाषा-व्यवस्था एवं भाषा-व्यवहार, भाषा-संरचना एवं भाषिक प्रकार्य की विवेचना, भाषा तथा व्यक्ति और समाज/भाषा और विचार/भाषा और संस्कृति तथा भाषा और साहित्य के संबंध में, भाषा-क्षेत्र एवं भाषा के विविध रूपों के संबंध में विश्व के भाषा-परिवारों की विवेचना, भारत - यूरोपीय भाषा-परिवार के संबंध में विचार, भाषा विज्ञान के नामकरण, परिभाषा, स्वरूप एवं व्याप्ति अथवा अध्ययन-क्षेत्र के संबंध में, भाषा विज्ञान की अध्ययन पद्धतियाँ अथवा भाषा-अध्ययन की दिशाओं के संबंध में, भाषा विज्ञान के प्रमुख विभागों अथवा भाषा विज्ञान की प्रमुख शाखाओं के सम्बन्ध में विचार प्रस्तुत किया गया है।
इसके अंतर्गत ध्वनि विज्ञान अथवा स्वन विज्ञान, स्वनिम विज्ञान, रूपिम विज्ञान, वाक्य विज्ञान तथा अर्थ विज्ञान, अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान की शाखाओं में भाषा शिक्षण, अनुवाद विज्ञान, कोश विज्ञान प्रमुख हैं। भाषा विज्ञान से संबंधित अध्ययन विभाग हैं - मनोभाषाविज्ञान, मानवजाति, भाषा- विज्ञान, समाज भाषा विज्ञान, शैली विज्ञान ।
देवनागरी लिपि की विशेषताओं, वैज्ञानिकता एवं मानकीकरण के सम्बन्ध में विचार तथा प्रमुख वैयाकरणों एवं प्रमुख भाषा वैज्ञानिकों की विवेचना की गई है....
मुझे विश्वास है कि हिन्दी जगत में इस पुस्तक का स्वागत होगा.।
महावीर सरन जैन

















