| More Information | |
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2025 |
| Edition Year | 2025, Ed. 1st |
| Pages | 218p |
| Publisher | Lokbharti Prakashan |
| Dimensions | 22.5 X 14.5 X 2 |
Adhyatm Parampara Aur Gorakhbani Author: Dr. Pooja Somani
गोरख का लक्ष्य अध्यात्म प्राप्ति है। पिंड और ब्रह्मांड ही इसके तत्व हैं। पिंड ब्रह्मांड की लघु प्रतिभूति है। अतः आत्मा को जानने के लिए बाहर भटकने की आवश्यकता नहीं है। वह काष्ठ में अग्नि की भाँति अन्तर्निहित है। ब्रह्मचर्य, आत्मसंयम, आत्म-विचार, युक्ताहार-विहार द्वारा दैनंदिन कार्यों को निष्पादित करते हुए भी सहज समाधि में स्थित रह सकता है। अपनी प्रकृति व स्वभाव के अनुसार किसी भी स्तर से चेतना को भीतर उलटाने की प्रेरणा गोरख के योग में मंत्रयोग, लययोग, राजयोग, ज्ञानयोग का अनुभव कराती है। गोरख स्त्री-विरोधी नहीं हैं। वह सम्मोहित कर साधन-पद से च्युत करने वाली शक्ति के रूप में स्त्री का विरोध करते हैं। विगलित सामाजिक रूढ़ियों, वाह्याचार, साम्प्रदायिक संकीर्णताओं के प्रति घोर विरोध प्रदर्शित करते हैं। जर्जरित मूल्य-मर्यादाओं का पुनरुद्धार करने वाले गोरख के प्रति लोगों में उदासीनता रही है, जबकि उनके आत्मज्ञान का डिंडमनाद परवर्ती सन्त साहित्य में गुंजायमान होकर सम्मानित होता है। गोरख के क्रान्तिकारी विचार अद्यतन प्रासंगिक व मूल्यवान हैं, जो हमारे जीवन के लक्ष्य तथा सामाजिक दृष्टि को आमूल बदल सकते हैं। दुरुहता व रहस्यात्मकता के कोर-कल्पित आवरण से निकालकर गोरख को नए सिरे से जानने के लिए इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें।

















