| More Information | |
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Paper Back |
| Translator | Not Selected |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2026 |
| Edition Year | 2026, Ed. 1st |
| Pages | 200p |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 20 X 12.5 X 1.5 |
Shukmaya Hangma Author: Shobha Limboo
‘शुकमाया हाङमा’ लिम्बू आदिवासी समुदाय की एक सशक्त, स्वाभिमानी स्त्री की सच्ची कहानी पर आधारित उपन्यास है।
शुकमाया के जीवन का आरम्भ नैसर्गिक सुषमा से परिपूर्ण और पारम्परिक जीवनशैली की प्रधानता वाले परिवेश में होता है। लेकिन विवाह के बाद वह ख़ुद को न केवल नई जगह और नए परिवेश में पाती है, बल्कि उसका जीवन भी नई चुनौतियों से घिर जाता है। बर्मा युद्ध का छिड़ना शुकमाया के लिए एक प्रचंड आघात साबित होता है जिसमें उसे अपने पति, पुत्र और श्वसुर को खो देना पड़ता है। वस्तुत: बर्मा युद्ध को पृष्ठभूमि बनाकर रची गई यह कृति उस युद्ध के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पीड़ा और क्षत-विक्षत मन की कहानी को भी पूरी मार्मिकता से सामने लाती है।
विपरीत-से-विपरीत परिस्थितियों में शुकमाया जिस दृढ़ता से खड़ी रहती है और जीवन को सँभालती चलती है, वह अपनी परवर्ती पीढ़ी के लिए प्रेरक और स्मरणीय बन जाती है। जिस आदिवासी समुदाय और जिस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अंकन इस उपन्यास में किया गया है वह हिन्दी पाठकों के लिए अपेक्षाकृत कम जाना-सुना है। इस तरह देखें तो यह उपन्यास हिन्दी साहित्य में एक नया अध्याय जोड़ता है।

















