- Publisher : Vani Prakashan
- Author: Ashok Jahnavi Prasad , Savita Rani Singh
- Format: Hardcover
- Publication date : Jan. 20 2026
- Edition : First Edition
- Language : Hindi
- ISBN-10 : 9373488112
- ISBN-13 : 978-9373488110
- Item weight : 400 g
- Reading age : 18 years and up
- Dimensions : 23 x 2 x 15 cm
Sau Utkrisht Aavishkaron Ki Rochak Gatha
100 उत्कृष्ट आविष्कारों की रोचक गाथा
यह पुस्तक दैनिक जीवन में नित्य उपयोग में आने वाले उपकरणों के जन्म की गाथा है, क्योंकि हम इनसे न ही परिचित हैं और न ही इन्हें जानने की आवश्यकता समझते हैं, जबकि हर यन्त्र अपने विकास की रोमांचक गाथा अपने में समेटे है। हमारी ज़िन्दगी को सरल और आसान बनाने की इच्छा से प्रेरित होकर ये आविष्कार किये गये हैं।
ये हमें गति भी प्रदान करते हैं। मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान इन तीनों क्षेत्र में आविष्कारों ने क्रान्तिकारी परिवर्तन किया है। एक वो समय था जब हमारे घर की महिलाएँ सूर्योदय से सूर्यास्त तक केवल भोजन कार्य में ही संलग्न रहती थीं, परन्तु आज ऐसे-ऐसे उपकरण हमारे पास हैं, जो अल्पसमय में ही भाँति- भाँति के स्वादिष्ट व्यंजन बनाने और परोसने का सामर्थ्य रखते हैं, जिस कारण घर बाहर की ज़िम्मेदारियाँ निभाना सरल हो गया, आधी आबादी कन्धे से कन्धा मिला चल सकी। कपड़ा मिलों ने आम जन को वस्त्र सर्व सुलभ करा दिया। समय के विस्तार के साथ सुरक्षा के भी अनेक साधन मिल गये। आज खेल का मैदान भी नये- नये मनोरंजक खेलों को समेट रखा है। विभिन्न सरलीकरण के साथ-साथ लागत पर भी खोजियों ने ध्यान दिया। समस्त आविष्कारों को एक स्थान पर समेटना कठिन था अतः मात्र सौ को ही यहाँ लिपिबद्ध किया गया है। सृजन के पूर्व की व्यथा और सृजन के बाद के सुख का अनुभव आपको यहाँ मिलेगा। दो तथ्यों ने लेखक द्वय को इस पुस्तक के लिए प्रेरित किया—
प्रथम उन नवप्रवर्तकों को सम्मान देना तथा उनके उत्साह और जुनून को दर्शाना जिनके हम बहुत ऋणी हैं। द्वितीय असीम उत्साहपुंज, नवोन्मेषी भावनाओं से ओतप्रोत हमारी युवा पीढ़ी, आविष्कारों के पूर्व हुए उल्लेखनीय प्रयास और परिणाम के बाद के सुकून से प्रेरणा लेकर अपना नाम भी स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा लें।

















