AUTHOR ; पी.सी. जैन (P C Jain)
ISBN ; 9788131614235
Publication Year ; 2025
Pages; 343 pages
Binding ; Hardback
Sale Territory; World
परिवर्तन एवं विकास का समाजशास्त्र (Sociology of Change and Development)
समाजशास्त्र एक वृहत् विज्ञान है जो समाज के हर पक्ष का वैज्ञानिक अध्ययन करता है। इसी श्रेणी में दो महत्वपूर्ण पक्ष भी है जिन्हें समाजशास्त्र के विद्यार्थियों को समझना आवश्यक है और ये पक्ष हैं परिवर्तन ;ब्ींदहमद्ध और विकास ;क्मअमसवचउमदजद्ध। ये दोनों ही प्रक्रियाएँ या अवधारणाएँ परस्पर रूप से सम्बद्ध है। जहाँ परिवर्तन है वहाँ विकास होगा ही, और जहाँ विकास होगा, वहाँ परिवर्तन अवश्यम्भावी है। इस पुस्तक का मुख्य ध्येय सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक-आर्थिक विकास से हैं। इन अवधारणाओं से जुड़े विभिन्न पक्षों का विश्लेषण समाजशास्त्र के विद्यार्थी के लिये आवश्यक है और इससे उसकी समाजशास्त्रीय समझ विकसित होती है। इसी परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए परिवर्तन की अवधारणा को विशद् रूप से समझते हुए विकास से जुडे़ विभिन्न आयामों को समाजशास्त्रीय संदर्श से प्रस्तुत किया है।
परिवर्तन और विकास का समाजशास्त्र पूर्णरूपेण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रस्तुत पाठ्यक्रमानुसार लिखी गयी है ताकि विद्यार्थी विषय से जुड़ी सम्पूर्ण सामग्री एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकें। परिवर्तन के कारक, सिद्धान्त और प्रक्रियाओं का विश्लेषणात्मक समावेश पुस्तक में प्रस्तुत हैं, तो दूसरी तरफ विकास की बदलती अवधारणाएँ, विकास का आलोचनात्मक परिप्रेक्ष्य, अल्प विकास के सिद्धान्त, विकास के पथ एवं अभिकरण, सामाजिक संरचना और विकास के परस्पर सम्बन्ध, संस्कृति एवं विकास के सम्बन्धों की व्याख्या और भारतीय संदर्भ में विकास, सामाजिक नीतियाँ एवं कायक्रमों के मूल्यांकन एवं निगरानी की समुचित व्याख्या की गयी है।

















